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आत्महत्या करना एक महापाप है ?

आज सर्व शिक्षित समाज मनुष्य के मूल उद्देश्य को न समझकर आत्महत्या कर रहा है ?

वर्तमान में लोग एक दूसरे पर आरोप लगाकर आत्महत्या करते हैं, आपसी में कलेश बढ़ता है, जिससे मां, बहन ,बेटी, भाई आत्महत्या कर लेते हैं। कुछ लोग जहर खा कर अपना शरीर गवा देते हैं, आखिर ऐसा क्यों हो रहा है ? आइए इस मानव जीवन पर प्रकाश डालते हैं। 



जिस दिन आपको यह समझ आ जाएगा कि “मानुष जन्म दुर्लभ है” उस दिन आत्महत्या करने के बारे में नहीं बल्कि नए सिरे से जीवन को जीने के बारे में सोचोगे। आत्महत्या करने के लाखों कारण और तरीके हो सकते हैं परंतु हम इस गलत तरीके से आपको मौत को गले लगाने नहीं देंगे । 
आपको जीवन को नए सिरे से जीने का सतमार्ग दिखाएंगे। आपको किसी हमदर्द और हमदर्दी की नहीं बल्कि जीवन का महत्त्व बताने वाले सतगुरू की आवश्यकता है। क्या आपको याद है कि जब आप मां के गर्भ में नौ महीने थे जब आपका कच्चा शरीर था , परमात्मा ने माता पिता के संयोग से पानी की एक बूंद से आपका शरीर बनाया। आपका कितना सुन्दर शरीर है जिसे आप जी थोड़ी सी परेशानी आने और चिंता होने पर समाप्त करने के बारे में सोचते हैं। सृष्टि के आरंभ से लोग अपने को सुखी देखना पसंद करते हैं लोगों को कोई काम न करना पड़े ,इसलिए वह इस धरती पर सुख ढूंढ रहे हैं लेकिन ऐसा इस धरती पर संभव नहीं है । 

कबीर साहेब जी अपनी वाणी में कहते है :- 

कबीर, थे ऊपर ने पैर तले ने सिर तेरा,
रोवे था के भजन करूंगा हर तेरा।। 
मां के पेट में दिन रात चक्कर काटते हुए कहता था कि हे परमात्मा! मुझे इस नरक से बाहर निकालो मैं दिन रात आपका भजन करूंगा और अब तकलीफ़ आने पर जीवन अंत करना चाहता है। तू उस परमात्मा को याद कर‌ जिसने नौ महीने मां के गर्भ में तेरी पल पल रक्षा की थी। तू उस पालनहार को याद कर वो तुझे यूं मरने नहीं देगा।

आज के समय में कौन दुखी नहीं है?


हम एक दूसरे के जीवन में  झांकते हैं कि सामने का व्यक्ति धन से सुखी है उसके पास गाड़ी है बंगला है जमीन है सभी प्रकार से वह सुखी संपन्न नजर आता है ,लेकिन ने जब उस व्यक्ति से पूछो तो दूसरे को कहता है कि हम सुखी नहीं वह सुखी है इस तरह से मन बिजली की तरह शरीर अंदर विराजमान होकर विवेकशील से काम करता हुआ आगे चला जाता है, और यही मन के द्वारा अत्यंत कष्ट हो जाता है ,जिसके अंतर्गत लोग अपने शरीर गवा देते हैं। अधिक जानकारी के लिए संत रामपाल जी महाराज की लिखित पुस्तक ज्ञान गंगा, जीने की राह सभी भाषाओं में उपलब्ध है आप कृपया सभी पुस्तक जरूर पढ़ें इसकी पीडीएफ फाइल नीचे दे रहे हैं।

आत्महत्या करने वाले के परिवार को मिलता है गहरा सदमा

सुबह जब राजू की मां उसे जगाने कमरे में गई तो देखा उसका शरीर पंखे से लटक रहा था। राजू ने दसवीं में तैंतीस प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। अंकों से नाखुश हो उसने आत्महत्या करना ज़्यादा बेहतर समझा। जबकि उसके माता-पिता ने उसे कोई उलाहना और डर नहीं दिखाया था। उसकी मां का रो रो कर बुरा हाल है। बेहतर होता यदि समय पर राजू माता पिता से खुलकर अपने दिल और डर की बात करता। ऐसा कोई कदम कभी न उठाएं जिससे आप तो बच कर निकल जाएं और जिन्हें आप पीछे छोड़ कर जा रहे हैं वह ताउम्र आपकी याद में रो रो कर रोज़ मरते रहें। याद रखें समस्या है तो समाधान निश्चित रूप से मौजूद है।


आत्महत्या कभी न करें?

इंसान अपने जीवन में कई प्रकार की समस्याओं का सामना करता है जैसे कि धन की कमी, शारीरिक और मानसिक दु:ख एवं अन्य पारिवारिक कलह और सामाजिक समस्याएं जैसे दहेज , गृहक्लेश ,नशे की लत, ताने, आत्मविश्वास की कमी, नौकरी न मिल पाना, संतान न होना , भूत प्रेत बाधा आदि यह सभी परेशानियां कभी कभी जटिल समस्या का रुप ले लेती हैं और इंसान इन समस्याओं का जब कोई समाधान नहीं प्राप्त कर पाता तो वह अंत में आत्महत्या करने जैसा गलत कदम उठाने में भी नहीं हिचकिचाते हैं जो उनके जीवन के साथ साथ परिवार को भी बर्बाद कर देता है।


मानुष जन्म दुर्लभ है, ये मिले न बारम्बार।
जैसे तरुवर से पत्ता टूट गिरे, बहुर न लागे डार।

यानि जिस प्रकार पेड़ की डाल से पत्ता टूट कर गिर जाता है और वह पुन: उस पेड़ पर ज्यों का त्यों नहीं लग सकता , ठीक इसी प्रकार मनुष्य जीवन समाप्त होने के बाद यह फिर से मिलना अत्यंत दुर्लभ होता है क्योंकि सतभक्ति के अभाव में व्यक्ति ने पाप कर्म के कारण आत्महत्या करने जैसा महापाप किया।


गरूड़ पुराण के अनुसार आत्महत्या करने वाला व्यक्ति भूत योनि में भटकता रहता है उसकी मुक्ति नहीं हो पाती। जबकि मनुष्य जन्म का उद्देश्य सांसारिक कर्म करते हुए सतभक्ति करना होता है तथा मोक्ष की प्राप्ति मूल उद्देश्य है।

जो इंसान अपने जीवन को आत्महत्या करके समाप्त करता है वह महापाप का भागी होता है ऐसे इंसान को भगवान कभी माफ नहीं करता क्योंकि परमात्मा की दया और पिछले पुण्य कर्मों से मनुष्य जीवन मिलता है और मनुष्य जीवन केवल पूर्ण परमात्मा की सतभक्ति और सत्कर्म करने के लिये मिलता है जिनको न करने के कारण और अपनी समस्याओं में उलझकर इंसान आत्महत्या करके महापाप का भागी हो जाता है। संत रामपाल जी महाराज बताते हैं कि आत्महत्या और हत्या करना महापाप है यह घोर अपराध हैं ऐसे कर्म करने वाले को नरक में घोर सज़ा दी जाती है। 

कैसे करें आत्महत्या करने से अपना बचाव

यह बात आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि यदि इंसान अपने जीवनकाल में पूर्ण परमात्मा की भक्ति करता है तो उसके जीवन में आने वाली समस्या व परेशानियां हल्के में टल जाती हैं । सतभक्ति करने वाला मनुष्य जीवन को अनमोल समझ कर पाप और पुण्य तोलता है और अपने मन को विकारों से दूर रखता है। समस्या आने पर परमात्मा से समाधान की आशा और उम्मीद रखता है और खुशी की बात यह है कि परमात्मा पर उसका अटूट विश्वास कभी उसे डगमग नहीं होने देता। नकारात्मक विचार उसके मन मस्तिष्क पर हावी नहीं होते। पूर्ण परमात्मा अपने भक्त और शिष्य की पग- पग पर रक्षा करता है। यह बात अटल सत्य है कि पूर्ण परमात्मा की सतभक्ति करने से इंसान के हर प्रकार के असहनीय से असहनीय शारीरिक और मानसिक कष्टों का निवारण होता है।

सतभक्ति से हर प्रकार की समस्याओं का अंत निश्चित है

मनुष्य के जीवन में आने वाली प्रत्यक्ष – अप्रत्यक्ष , गंभीर और बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान सतभक्ति से शत प्रतिशत संभव है। केवल वही मनुष्य आत्महत्या या खुदकुशी कर सकता या करता है जो पूर्णसंत या पूर्ण परमेश्वर कबीर जी की भक्ति से वंचित होता है।

अधिकतर मनुष्यों को सतभक्ति की जानकारी नहीं होती लेकिन आज वर्तमान में सतभक्ति क्या है? कैसे की जाती है? इसका भेद खुल गया है । सतभक्ति का अर्थ होता है पूर्ण परमात्मा ( सबका मालिक एक ) को पहचान कर तत्त्वदर्शी संत द्वारा नामदीक्षा ग्रहण करके मर्यादा में रहकर भक्ति करना, क्योंकि केवल पूर्ण परमात्मा ही सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान कर सकता है और उनको दूर भी तुरंत कर देता है । बड़ी से बड़ी शारीरिक , मानसिक बीमारी और महामारी का भी अंत सतभक्ति से संभव है चाहे कैंसर हो या कोरोना। यदि इंसान पूर्ण परमात्मा कबीर जी की सतभक्ति संत रामपाल जी महाराज जी से प्राप्त करके मर्यादा में रहकर करता है तो समस्या जड़ से समाप्त हो जाती है ।

वर्तमान में पूर्ण गुरु तत्वदर्शी संत कौन है,जिनसे मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है ?

आज वर्तमान में इस धरती पर तत्वदर्शी संत ( पूर्ण संत , बाखबर ) कोई और नहीं बल्कि संत रामपाल जी महाराज जी हैं जो सर्व पवित्र सदग्रंथों के आधार से प्रमाणिक ज्ञान भक्त समाज को प्रदान कर रहे हैं जिससेे उनके हर प्रकार के रोग कष्टों और परेशानियों का जड़ से समाधान हो रहा है और सर्व समाज पूर्ण मोक्ष प्राप्त कर रहा है  । संत रामपाल जी महाराज जी एकमात्र तत्त्वदर्शी संत हैं जिनका ज्ञान वेदों और अन्य धार्मिक पुस्तकों पर आधारित है। संत रामपाल जी का ज्ञान समझने के बाद आत्महत्या जैसे कुविचार आपको मौत के मुंह में जाने से बचाएंगे।

अज्ञानता तथा सामाजिक कुरीतियों जैसे दहेज के कारण न जाने कितनी बेटियां आत्महत्या कर लेती हैं। परंतु संत रामपाल जी महाराज के सत्संग वचन सुनकर कई उजड़े परिवार हंसी खुशी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। संत रामपाल जी महाराज के बताये आध्यात्मिक ज्ञान से आज लाखों व्यक्तियों को जीने की नई राह मिली है। संत जी के बताये आध्यात्मिक ज्ञान से उनके सभी अनुयायी मानसिक तनाव, गृह कलेश, दहेज, नशा आदि समस्याओं से कोसों दूर हो चुके हैं। अपना जीवन नष्ट करने की बजाय उसे संत जी से नाम दीक्षा लेकर सार्थक बनाएं और मोक्ष पाएं। यदि सुख से जीवन जीना है तो पूर्ण संत रामपाल जी महाराज जी से नाम उपदेश लेकर सतभक्ति करनी चाहिए।

विश्व के सभी प्राणियों को संत रामपाल जी महाराज जी के ज्ञान को जल्द समझ कर सतभक्ति ग्रहण करनी चाहिए ताकि मनुष्य जीवन को बचाया जा सके। अनमोल जीवन को कैसे बचाएं यह जानकारी प्राप्त करने के लिए हमें निम्नलिखित नंबर पर काॅल करें: 7496 801 825

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